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पूज्य गुरुदेव गच्छाधिपति आचार्य प्रवर श्री जिनमणिप्रभसूरीश्वरजी म.सा. एवं पूज्य आचार्य श्री जिनमनोज्ञसूरीजी महाराज आदि ठाणा जहाज मंदिर मांडवला में विराज रहे है। आराधना साधना एवं स्वाध्याय सुंदर रूप से गतिमान है। दोपहर में तत्त्वार्थसूत्र की वाचना चल रही है। जिसका फेसबुक पर लाइव प्रसारण एवं यूट्यूब (जहाज मंदिर चेनल) पे वीडियो दी जा रही है । प्रेषक मुकेश प्रजापत फोन- 9825105823
स्वयं विचार कीजिये :- क्या है सबसे बेहतर !!!
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इतना कुछ होते हुए भी
शब्दकोश में असंख्य शब्द होते हुए भी...
मौन होना सब से बेहतर है।
दुनिया में हजारों रंग होते हुए भी...
सफेद रंग सब से बेहतर है।
खाने के लिए दुनिया भर की चीजें होते हुए भी...
उपवास शरीर के लिए सबसे बेहतर है।
पर्यटन के लिए रमणीक स्थल होते हुए भी..
पेड़ के नीचे ध्यान लगाना सबसे बेहतर है।
देखने के लिए इतना कुछ होते हुए भी...
बंद आँखों से भीतर देखना सबसे बेहतर है।
सलाह देने वाले लोगों के होते हुए भी...
अपनी आत्मा की आवाज सुनना सबसे बेहतर है।
जीवन में हजारों प्रलोभन होते हुए भी...
सिद्धांतों पर जीना सबसे बेहतरहै।
इंसान के अंदर जो समा जायें वो
" स्वाभिमान "
और
जो इंसान के बहार छलक जायें वो
" अभिमान "
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Tatvarth sutra Prashna
1. तत्वार्थसूत्र का अन्य नाम है- मोक्षपाहुड मोक्षशास्त्र R मोक्षमार्गप्रकाशक उपर्युक्त सभी 2. सात तत्वों में से कितने तत्व द्रव्य हैं और कितने पर्याय? 2 और 5 R 5 और 2 3 और 4 4 और 3 3. अवधिज्ञान से जाने गये पदार्थ से कितना सूक्ष्म विषय मनःपर्यय जान लेता है- संख्यातगुणा सूक्ष्म असंख्यातगुणा सूक्ष्म अनन्तगुणा सूक्ष्मR अनियत है
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